बटुक भैरव मंदिर कमख्या
Varanasi, India
About the Temple & History
बटुक भैरव की पौराणिक कथा बहुत समय पहले पृथ्वी पर एक अत्याचारी दैत्य का आतंक बढ़ गया था। वह ऋषियों के यज्ञ नष्ट कर देता, साधुओं को परेशान करता और धर्म के मार्ग में बाधा डालता था। देवताओं ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह अनेक वरदानों के कारण अजेय था। कहा जाता है कि उसे यह वर प्राप्त था कि उसका वध किसी बालक के हाथों ही होगा। जब देवता और ऋषि संकट में पड़ गए, तब वे भगवान शिव की शरण में पहुंचे। भक्तों की पुकार सुनकर भगवान शिव ने एक अद्भुत बालक का रूप धारण किया। यह बालक साधारण नहीं था; उसके शरीर से दिव्य तेज निकल रहा था। यही बाल स्वरूप बटुक भैरव कहलाया। दैत्य ने उस छोटे बालक को देखकर उसका उपहास किया और उसे कमजोर समझा। लेकिन जैसे ही युद्ध आरंभ हुआ, बालक रूपी बटुक भैरव ने अपना दिव्य पराक्रम दिखाया। थोड़े ही समय में उन्होंने उस दैत्य का संहार कर दिया और धर्म की रक्षा की। देवताओं ने प्रसन्न होकर उनकी स्तुति की और उन्हें संसार के रक्षक के रूप में सम्मान दिया। काशी से जुड़ी मान्यता कहा जाता है कि भगवान शिव को काशी अत्यंत प्रिय है। उन्होंने इस पवित्र नगरी की रक्षा के लिए अपने भैरव स्वरूपों को यहां स्थापित किया। बटुक भैरव को विशेष रूप से भक्तों के संकट दूर करने, भय मिटाने और बच्चों की रक्षा करने का दायित्व दिया गया। इसलिए वाराणसी के कमच्छा स्थित बटुक भैरव मंदिर में लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। मान्यता है कि बाबा सच्चे मन से की गई प्रार्थना को शीघ्र सुनते हैं और भक्तों को संकटों से बचाते हैं। अखंड ज्योति की कथा मंदिर में एक अखंड दीप प्रज्वलित रहता है। स्थानीय मान्यता है कि यह दीपक भैरव बाबा की निरंतर उपस्थिति और कृपा का प्रतीक है। श्रद्धालु इस दीप के दर्शन करके अपने जीवन से अंधकार, भय और बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं। भक्तों की श्रद्धा काशी में एक कहावत प्रचलित है कि: "जिस पर बटुक भैरव की कृपा हो जाए, उसके मार्ग की बड़ी से बड़ी बाधा भी दूर हो जाती है।" इसी विश्वास के कारण मंगलवार, रविवार और भैरव अष्टमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। बटुक भैरव बाबा को शिव का ऐसा स्वरूप माना जाता है जो बालक की सरलता और भैरव की शक्ति—दोनों का संगम है। इसलिए वे एक साथ दयालु भी हैं और अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रचंड भी।
This sacred shrine has been a center of spiritual energy and Vedic study for centuries. According to historical scriptures, the temple resides on a geometric alignment that naturally amplifies spiritual intentions, mantras, and meditation. Millions of pilgrims visit this holy space annually to witness the divine aura and take part in sacred aartis.
Daily Puja & Aarti Schedule
The temple hosts multiple daily aartis and bhog rituals. Booking details for these special Pujas can be found in the sidebar or under the puja section.
Mangala Aarti
Performed at dawn to awaken the deityBhog Aarti
Midday offering of seasonal fruits and cooked prasadsSandhya Aarti
Sunset lamp lighting ceremony with damru & drums chantsShayan Aarti
Night resting prayers, temple gates closingPujas at this Temple
Book virtual Pujas performed by native temple priests under your Gotra.
Offerings at this Temple
Send physical offerings like flowers, vastra, or sweets directly to the shrine.