लोलार्क कुंड & माँ महिषासुरमर्दिनी
Varanasi
About the Temple & History
मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर: काशी का अद्भुत शक्तिपीठ धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है। यहां जितने प्रसिद्ध मंदिर भगवान शिव के हैं, उतने ही श्रद्धा और आस्था के केंद्र मां आदिशक्ति के भी हैं। काशी में देवी के अनेक प्राचीन और चमत्कारी मंदिर स्थित हैं, जिनकी अपनी अलग महिमा और मान्यता है। इन्हीं में से एक है भदैनी क्षेत्र में लोलार्क कुंड के समीप स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का प्राचीन मंदिर, जो अपने अद्भुत चमत्कारों और रहस्यमयी स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। मां महिषासुर मर्दिनी देवी दुर्गा का ही एक उग्र और शक्तिशाली स्वरूप हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब महिषासुर नामक अत्याचारी राक्षस ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था, तब देवताओं की प्रार्थना पर आदिशक्ति ने महिषासुर मर्दिनी के रूप में अवतार लेकर उसका संहार किया था। इसी कारण देवी को अधर्म और अन्याय के विनाश की प्रतीक माना जाता है। काशी के इस मंदिर के बारे में श्रद्धालुओं की विशेष मान्यता है कि मां के दर्शन और पूजन से शत्रुओं का नाश होता है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। नवरात्र के दिनों में यहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। इस मंदिर की सबसे अद्भुत और रहस्यमयी विशेषता यह है कि यहां विराजमान मां महिषासुर मर्दिनी का स्वरूप दिन में तीन बार बदलता हुआ दिखाई देता है। प्रातःकाल में माता का मुखमंडल बालिका के समान कोमल और तेजस्वी प्रतीत होता है। दोपहर में उनका स्वरूप युवती जैसा दिखाई देता है, जबकि संध्या समय माता वृद्धा के रूप में दर्शन देती हैं। इस चमत्कारी परिवर्तन को देखने और अनुभव करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां स्वयं अपने भक्तों को दिन के तीनों कालों में जीवन के विभिन्न चरणों का संदेश देती हैं। यही कारण है कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और दिव्य शक्ति का अद्भुत केंद्र माना जाता है। काशी के लोलार्क कुंड के निकट स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का यह मंदिर आज भी भक्तों के लिए अटूट विश्वास का प्रतीक है। यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु मां की दिव्य शक्ति और चमत्कारिक उपस्थिति को अनुभव करता है तथा उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करता है। लोलार्क कुंड की पौराणिक और धार्मिक कथा वाराणसी के लोलार्क कुंड को काशी के सबसे प्राचीन और पवित्र कुंडों में से एक माना जाता है। यह भदैनी क्षेत्र में स्थित है और इसका संबंध भगवान सूर्यदेव से बताया जाता है। "लोलार्क" शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— लोल अर्थात् "कंपित या झूलता हुआ" और अर्क अर्थात् "सूर्य"। इसलिए लोलार्क का अर्थ हुआ "झूलते या कंपित सूर्य"। पौराणिक कथा कहा जाता है कि एक समय भगवान सूर्यदेव काशी की महिमा सुनकर यहां आए। काशी की दिव्यता और भगवान शिव के तेज को देखकर सूर्यदेव इतने अभिभूत हुए कि उनका तेज मानो डोलने लगा। उसी स्थान पर सूर्य की शक्ति पृथ्वी पर प्रकट हुई और वहां एक पवित्र जलकुंड बना, जिसे लोलार्क कुंड कहा गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने सूर्यदेव को काशी की रक्षा का दायित्व सौंपा था। सूर्यदेव ने यहां तपस्या की और अपने तेज से इस कुंड को पवित्र बनाया। तभी से यह स्थान सूर्य उपासना का प्रमुख केंद्र बन गया। संतान प्राप्ति की मान्यता लोलार्क कुंड की सबसे प्रसिद्ध मान्यता संतान प्राप्ति से जुड़ी है। कहा जाता है कि जिन दंपतियों को संतान सुख नहीं मिलता, वे यहां श्रद्धापूर्वक स्नान और पूजा करते हैं तो सूर्यदेव तथा मां शक्ति की कृपा से उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। भाद्रपद माह में मनाया जाने वाला लोलार्क षष्ठी (लोलार्क छठ) पर्व इसी कारण अत्यंत प्रसिद्ध है। इस दिन हजारों दंपति कुंड में स्नान कर संतान सुख और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। मां महिषासुर मर्दिनी का संबंध लोलार्क कुंड के समीप ही मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर स्थित है। मान्यता है कि यहां मां दुर्गा ने महिषासुर के विनाश के बाद विश्राम किया था। इसलिए सूर्य शक्ति और देवी शक्ति दोनों का संगम इस क्षेत्र को विशेष सिद्ध स्थल बनाता है। लोलार्क कुंड की विशेषता यह काशी के सबसे प्राचीन सूर्य तीर्थों में गिना जाता है। कुंड तक पहुंचने के लिए ऊंची-ऊंची सीढ़ियां बनी हैं। लोलार्क षष्ठी के दिन यहां विशाल मेला लगता है। संतान प्राप्ति और रोग निवारण की विशेष मान्यता है। यह स्थान सूर्यदेव और भगवान शिव दोनों की कृपा का प्रतीक माना जाता है। काशी की मान्यता है कि "जो श्रद्धा से लोलार्क कुंड में स्नान कर सूर्यदेव का पूजन करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।" यही कारण है कि यह कुंड सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
This sacred shrine has been a center of spiritual energy and Vedic study for centuries. According to historical scriptures, the temple resides on a geometric alignment that naturally amplifies spiritual intentions, mantras, and meditation. Millions of pilgrims visit this holy space annually to witness the divine aura and take part in sacred aartis.
Daily Puja & Aarti Schedule
The temple hosts multiple daily aartis and bhog rituals. Booking details for these special Pujas can be found in the sidebar or under the puja section.
Mangala Aarti
Performed at dawn to awaken the deityBhog Aarti
Midday offering of seasonal fruits and cooked prasadsSandhya Aarti
Sunset lamp lighting ceremony with damru & drums chantsShayan Aarti
Night resting prayers, temple gates closingPujas at this Temple
Book virtual Pujas performed by native temple priests under your Gotra.
Offerings at this Temple
Send physical offerings like flowers, vastra, or sweets directly to the shrine.